वित्त मंत्रालय की ओर से यह प्रस्ताव रिज़र्व बैंक को दिया गया था. प्रस्ताव में रिज़र्व बैंक के पास जमा कुल रकम या पूंजी 9.59 लाख करोड़ रुपये में से एक तिहाई यानी 3.6 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस रकम केंद्र सरकार को देने की बात कही गई थी।हालांकि सरकार को केंद्रीय बैंक के भंडार से इतनी बड़ी राशि देने के बाद अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा, इस वजह से सरकार के इस प्रस्ताव को बैंक की ओर से नामंज़ूर कर दिया गया था।

केंद्र सरकार की राय है कि कुल पूंजी को लेकर केंद्रीय बैंक का अनुमान ज़रूरत से ज़्यादा है। इस वजह से उसके पास 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि है।

उल्लेखनीय है कि इस तरह की खबरें आ रही हैं कि उर्जित पटेल की अगुवाई वाले आरबीआई और सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नरविरल आचार्य के बाद केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच मतभेद खुलकर सतह पर आ गए थे।

डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि जो सरकारें अपने केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का सम्मान नहीं करतीं उन्हें देर सबेर ‘बाज़ारों के आक्रोश’ का सामना करना पड़ता है।

इसके बाद यह सामने आया कि सरकार ने एनपीए नियमों में ढील देकर क़र्ज़ सुविधा बढ़ाने सहित कई मुद्दों के समाधान के लिए आरबीआई अधिनियम के उस प्रावधान का इस्तेमाल किया है, जिसका उपयोग पहले कभी नहीं किया गया था ताकि वृद्धि दर तेज़ की जा सके। हालांकि केंद्रीय बैंक की सोच है कि इन मुद्दों पर नरमी नहीं बरती जा सकती है।

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)